रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक समीक्षा बैठक आज से शुरू हो रही है. अहम बात ये है कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के कार्यकाल की यह पहली समीक्षा बैठक है. जानकारों के मुताबिक राजकोषीय मार्चे पर चुनौतियों और कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने से समिति के लिए नीतिगत ब्याज दर घटाना अभी संभव नहीं लगता है. यानि आपकी होम लोन की ईएमआई यथास्थिति बरकरार रह सकती है.
इससे पहले की मौद्रिक समीक्षा बैठक में भी केंद्रीय बैंक ने बेंचमार्क ब्याज दर यानी रेपो रेट 6.5 फीसदी पर स्थिर रखी थी और रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी पर यथावत रखी गई थी. बता दें कि उर्जित पटेल की अगुवाई में दिसंबर में आखिरी समीक्षा बैठक हुई थी. बैठक के परिणामों की घोषणा के बाद उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. वहीं शक्तिकांत दास ने 12 दिसंबर को आरबीआई की कमान संभाली.
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री समीर नारंग के मुताबिक बैठक में आरबीआई नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ कर सकती है. उन्होंने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय कमी के अलावा वैश्विक वृद्धि सुस्त पड़ने से 2018-19 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति चार फीसदी के दायरे में रहने वाली है. इससे रिजर्व बैंक के पास मौका बनेगा कि वह नीतिगत रुख बदले. ’बता दें कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के 3.8 प्रतिशत के अनुमान से कम 2.6 प्रतिशत रही. वहीं केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 7.01 लाख करोड़ रुपये रहा. वर्ष 2018- 19 में राजकोषीय घाटा 6.24 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है. सरकारी आकड़ों के अनुसार रेवेन्यू वसूली की रफ्तार कम होने से घाटे का आंकड़ा बढ़ गया है.
पीयूष गोयल संबोधित करेंगे बोर्ड की बैठक
मौद्रिक नीति समीक्षा के दो दिनों बाद 9 फरवरी को कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक को संबोधित करेंगे. इस दौरान वह अंतरिम बजट के मुख्य बिन्दुओं को रेखांकित करेंगे. बैठक में वर्तमान वित्त वर्ष के लिए अंतरिम लाभांश के सरकार के अनुरोध पर भी विचार किया जाएगा. बैंक चालू वित्त वर्ष के लिए 40,000 करोड़ रुपये के लाभांश का भुगतान कर चुका है. बता दें कि बीते 1 फरवरी को अंतरिम बजट में पांच लाख तक की आय वालों को कर में छूट और 12 करोड़ किसानों के लिए आय समर्थन योजना की घोषणा की गई है.
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर फरार विजय माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर मुहर लगा दी है. अब माल्या के प्रत्यर्पण का मामला पूरी तरह से कोर्ट पर निर्भर है. बड़ा सवाल यह है कि क्या माल्या लोकसभा चुनाव तक यानी मई 2019 से पहले भारत लाया जा सकता है, इसका जवाब हां में है, लेकिन इसके लिए कुछ किंतु-परंतु हैं. आइए जानते हैं कि माल्या का जल्द प्रत्यर्पण किस सूरत में संभव है.
गौरतलब है कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश गत 10 दिसंबर, 2018 को ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के चीफ मजिस्ट्रेट ने दिया था, जिसे वहां के गृह मंत्री साजिद जावेद ने 3 फरवरी को मंजूरी दे दी है. अब विजय माल्या के पास ऊपरी अदालत में अपील के लिए 14 दिन का समय है. माल्या ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि भी की है कि वह इसके खिलाफ अपील करने जा रहा है. माल्या को वापस लाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जांच एजेंसियों ने लंबी लड़ाई लड़ी है.
विजय माल्या ने होम डिपार्टमेंट के निर्णय पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट में लिखा है, '10 दिसंबर, 2018 के वेस्टमिंस्टर कोर्ट के निर्णय के बाद ही मैने अपील की मंशा जाहिर की थी. होम सेक्रेटरी के निर्णय से पहले मैं अपील की प्रक्रिया की शुरुआत नहीं कर पाया. अब मैं अपील की प्रक्रिया शुरू करूंगा.'
माल्या की अपील पर सबसे पहले एक जज वाले हाईकोर्ट की बेंच में सुनवाई होगी. यह जज भी यदि प्रत्यर्पण के आदेश पर मुहर लगाते हैं, लेकिन आगे अपील की अनुमति भी दे देते हैं तो उसके बाद माल्या की अपील पर हाईकोर्ट के दो जज सुनवाई करेंगे. इसके बाद माल्या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है कि उसके केस की सुनवाई वहां की जाए. अगर सुप्रीम कोर्ट यह मंजूर कर लेता है तो पूरे मामले की सुनवाई पूरी होने में करीब 18 महीने लग जाएंगे.
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